My hindi poem- Taaron ke beech


दूर कहीं निकल पड़ा हूँ में,
तारों के बीच.

हर तारा कहता है मुझसे,
चमक चमक कर यह-

तू भी एक सितारा है,
ज़रा पहचान खुद को,
जगमगा दे अपनी रौशनी से,
सारे जहां को.

तू बरसात की एक बूँद है,
जो उतर गयी है ज़मीन पर,
अपनी नमी से इस जहां का निर्माण कर.

तू कलि है एक पौधे की,
जिसे खिलना है कभी न कभी,
अपने अदभुत रंगों की छवि फैला,
इस जहां को और रोशन बना.

तू एक नन्ही सी कश्ती है,
और यह जहां है एक विशाल सागर,
लहरों और तूफानों का सामना कर,
कश्ती साहिल पर तुझे ही लाना है.

दूर कहीं निकल पड़ा हूँ में,
तारों के बीच.
- Monu Awalla

4 comments:

Nidhi kaul said...

how premchand types moni.. but nice.. bohot uumda vichar dale hai.. aur bohot hi khoobsurati se darshaya hai.. :)

nancy said...

acha hai moni but the english 1ns r too good n funny

Geeta Singh said...

kabhi cloud 9 kabhi taare ...very inspirationalll poem,,, in my words .. tu apne pankh fela aur dorr gagan mei udta ja ..jaise ki ye badal taare sab kah rahe hai tu chalta ja chalta ja

Monu Awalla said...

thnx Geeta.. hehe.. yea definitely..:)

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